जानिए लोहड़ी कब क्यों और कैसे मनाते है-:Why lohadi is celebrated in hindi

लोहड़ी पंजाबी लोक महोत्सव प्रसिद्ध त्यौहार है.यह त्यौहार मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है.इस पर्व के 20-30 दिन पहले ही बच्चे लोहडी के लोकगीत गाकर लकड़ी और उपले इकठे करते है.फिर इकट्‍ठी की गई सामग्री को ‍चौराहे/मुहले के किसी खुले स्थान पर आग जलाते हैं। इस उत्सव को पंजाबी समाज बहुत ही जोशो-खरोश से मनाता है. इस दिन ढोल नगाड़ो के साथ डांस भंगड़ा भी किया जाता है. मन जाता है की जिस घर में कोई नयी शादी,या बच्चे का जन्म हुआ हो तो बहा लोहड़ी का पर्व और भी धूम धाम से मनाय जाता है. लोहड़ी पर्व रबी की फसल से जुड़ा हुआ है.

किसान इस दिन रबी की फैसले जैसे मक्का,तिल,गेंहू,सरसो आदि को अग्नि को समर्पित करते है और भगवान का आभार प्रकट करते है.इस पर्व का एक यह भी महत्व है की बुज़ुर्गो के साथ उत्सव मनाते हुए नई पीढ़ी के बच्चे अपनी पुरानी मान्यताओं एवं रीति रिवाजो का ज्ञान प्राप्त कर लेते है.ताकि भविष्य में पीढ़ी-दर पीढ़ी उत्सव चलता रहे,ढोल की थाप के साथ गिद्दा नाच का यह उत्सव शाम होते ही शुरू हो जाता है और देर रात तक चलता ही रहता है। वहां सभी उपस्थित लोगों को यही चीजें प्रसाद के रूप में बांटी जाती हैं। इसके साथ ही पंजाबी समुदाय में घर लौटते समय ‘लोहड़ी’ में से 2-4 दहकते कोयले भी प्रसाद के रूप में घर लाने की प्रथा आज भी जारी है.आइये दोस्तों जानते है की आखिर लोहड़ी का पर्व क्यों कब कैसे मनाया जाता है.

Why lohadi is celebrated in hindi

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लोहड़ी 2019

इस बार 2019 में लोहड़ी का त्यौहार पूरे भारत में 13 जनवरी को बड़े हर्षो उल्लास के साथ मनाया जायेगा बैसे लोहड़ी का त्यौहार हर साल 13 जनवरी को ही मनाया जाता है. परन्तु कभी-कभी सक्रांति का समय बदलने के कारण 12 या 14 जनवरी को भी लोहड़ी मनाई जाती है।

लोहड़ी क्यों मनाई जाता है-Why lohadi is celebrated

हर भारतीयों त्यौहार की तरह इस त्यौहार की तरह भी कुछ एतिहासिक कहानिया जुडी हुई है तो आइये जानते है उन इतिहासिक कहानियो के बारे में

श्री कृष्ण से जुड़ा है लोहड़ी का पर्व

एक इतिहासिक कहानी के अनुसार श्री कृष्णा के मामा कंस ने भगवान श्री कृष्ण को मारने के लिए एक लोहिता नामक राक्षसी को भेजा था परन्तु कंस ने भगवान् श्री कृष्ण को मारने के लिए जिसे भेजा था उसे भगवन श्री कृष्ण ने खेल खेल में उसका बध कर दिया जिस खुशी में लोगो ने लोहड़ी का त्यौहार मनाया था. जो आज तक भी बडी धूम धाम से माने जाता है.

लोहड़ी और दुल्ला भट्टी की कहानी से जुड़ा है लोहड़ी

लोहड़ी को त्यौहार लोहड़ी और दुल्ला भट्टी की कहानी से जुड़ा है माना जाता है, की दुल्ला भट्टी बादशाह अकबर शासन कल के दौरान पंजाब में रहते थे उसी समय सदल बार के जगह पर लड़कियों को गुलामी के लिए बल पूर्वक अमीर लोगो को बेंचा जाता था.जिसे दुल्ला भट्टी ने एक योजना के तहत उन लड़कियो को उनकी कैद से मुक्त कराया था.साथ ही उन्होंने हिंदू अनुष्ठानों के साथ उन सभी लडकियों की शादी हिंदू लड़कों से करवाने की व्यवस्था की और उन्हें दहेज भी प्रदान किया। जिस कारण वह पंजाब के लोगो के नायक बन गए.इसलिए आज भी लोहड़ी के गीतों में दुल्ला भट्टी का आभार व्यक्त करने के लिए उनका नाम जरुर लिया जाता हैं।

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कैसे मनाते है लोहड़ी का पर्व

लोहड़ी उत्तर भारत और खासकर पंजाब का सबसे लोकप्रिय त्यौहार हो.इस दिन लोग अपने घरो और चौराह के बहार लोहड़ी जलाते है. और आग का घेरा बनाकर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाते हुए रेवड़ी, मूंगफली और लावा खाते हैं.बैसे पांरपरिक तौर पर लोहड़ी का त्यौहार रवि की फसल से जुड़ा हुआ है.लोहड़ी के पर्व के दिन अलाव जलाकर उसके आस-पास लोगो के द्वारा डांस किया जाता है.और इस दिन लड़के भंगड़ा करते है. और लड़किया गिद्धा करती है.और इस दिन विवाहिता पुत्रियों को माँ के घर से वस्त्र,मिठाई,फल आदि भेजे जाते है.जिन परिवारों में लड़के का विवाह होता है या जिन्हें पुत्र प्राप्ति होती है, उनसे पैसे लेकर मुहल्ले या गांव भर में बच्चे ही रेवड़ी बांटते हैं.

कहाँ से आया लोहड़ी का शब्द

माना जाता है की लोहड़ी शब्द लोई(संत कबीर की पत्नी) से जुड़ा हुआ है, लेकिन कुछ लोग इसे तिलोड़ी से जुड़ा हुआ मानते है.जो बाद में लोहड़ी हो गया. वहीं, कुछ लोग यह मानते है कि यह शब्द लोह’ से उत्पन्न हुआ था, जो चपाती बनाने के लिए प्रयुक्त एक उपकरण है.

आग का क्या महत्व है

लोहड़ी पर आग जलाने को लेकर माना जाता है. की यह अग्नि राजा दक्ष की पुत्री सटी से जुड़ा हुआ है.माना जाता है की एक बार राजा दक्ष यज्ञ करवाया था और इसमें अपने दामाद शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया जिसका जबाब लेने के लिए सती निरास होकर अपने पिता के घर गयी पर राजा ने शिव जी की और अपनी पुत्री की बहुत निंदा की उनसे अपने पति का अपमान नहीं देखा गया और उन्होंने उसी यज्ञ में खुद को भस्म कर दिया. सती के मृत्यु का समाचार सुन खुद भगवान शिव ने वीरभद्र को उत्पन्न कर उसके द्वारा यज्ञ का विध्वंस करा दिया।

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