गोवेर्धन पूजा क्यों की जाती है -Why is Govardhan worship done

जैसा हम सभी जानते है की दिवाली की अगली सुबह गोवर्धन पूजा की होती है। इस दिन का भी बहुत बड़ा महत्व है। इस दिन भी दिवाली की खुशियां मनाई जाती हैं। दिवाली की अगली सुबह गोवर्धन पूजा की जाती है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों की पूजा की जाती है, परन्तु क्या आप ये जानते है की आखिर ये गोवेर्धन पूजा क्यों की जाती है, अगर नहीं जानतेहै तो आज हम आपको इसके बारे में बता देते है, जी हा आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे की गोवेर्धन पूजा क्यों की जाती है,

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गोवेर्धन पूजा क्यों की जाती है

गोवेर्धन पूजा क्यों की जाती है

कहा जाता है, की पहले द्वारपरयुग में इस दिन देवराज इंद्रा की पूजा की जाती थी लेकिन भगवान् श्री कृष्ण ने उनकी पूजा को बंद करा दिया और गोवेर्धन पूजा करने के लिए कहा था.भगवन इंद्रा सभी देवो में उच्च है तथा उन्हें स्वर्ग का राजा भी कहा जाता है. जो की बहुत अहंकारी था, जब श्री कृष्ण को ये पता चला की देव इंद्रा का अहंकार दिन पे दिन बढ़ता जा रहा है,इसलिए भगवान् श्री कृष्ण ने उनकी पूजा को बंद करने के लिए कहा और श्री कृष्ण ने वृंदावन के निवासियो को समझाया की गोवेर्धन की उपजाऊ मिटटी के कारण यहाँ घास उगती है.इसी हरी घास को हमारे बैल गाय चरते है.और खेतो की जुताई में हमारी मदद करती है.इसलिए इंद्रा की नहो गोवेर्धन की पूजा की जनि चाहिए।

भगवान् इंद्रा को इस बात पर गुस्सा आ गया और उन्होंने इससे क्रोधित होकर मूसलाधार बारिश कर दी. इंद्रा ने इतनी ज्यादा बारिस करके पूरे गोवेर्धन पर्वत को जलमग्र कर दिया और लोग अपने प्राण बचाने के लिए श्री कृष्ण को याद करने लगे.तब श्री कृष्ण ने ये देखा तो पहले वो देव इंद्रा के इस मूर्खता पर मुस्कुराये और फिर उन्होंने वृंदावन वासियो को वचन के लिए पूरा गोवेर्धन पर्वत अपनी ऊँगली पर उठा लिया और वृंदावनवासियो को उसके नीचे आने को बोला इंद्रा देव ने इस बारिश को लगातार 7 दिन तक की और भगवान् श्री कृष्ण ब्रजबासियों को उसी गोवेर्धन पर्वत के नीचे छाता बनाकर बचाते रहे है. और अंत में भगवान श्री कृष्ण की लीला के सामने देवराज इंद्रा भगवान श्री कृष्ण से हार गए और फिर बो भगवन श्री कृष्ण से क्षमा मांगने के लिए स्वर्ग से धरती पर आये. और उन्होंने भगवान् श्री कृष्ण से माफ़ी मांगी कहा जाता है इसी दिन से गोवेर्धन पूजा की जाने लगी थी।

इस बार यानी 2019 में गोवर्धन पूजा 29 नवंबर को की जाएगी। गोवर्धन को ‘अन्नकूट पूजा’ भी कहा जाता है। इस दिन लोग घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत का चित्र बनाकर गोवर्धन भगवान की पूजा करते हैं. भारत में हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है। इस पर्व का सीधा संबंध प्रकृति और मानव से होता है.

कैसे की जाती है गोवेर्धन पूजा

इस दिन, लोगों को ऊर्जा और उत्साह के साथ चार्ज किया जाता है। वे अपने घरों और कार्यालयों को मोमबत्तियां, फूल, रंगोली और के साथ सजाते है, यह गोवर्धन पर्वत का प्रतिनिधित्व करने के लिए गाय के गोबर के छोटे चूहों को बनाने का एक आम अनुष्ठान भी है, जो एक बार सूख जाता है, ताजा और खूबसूरत फूलों से सजाया जाता है। कुछ मंदिरों में इस दिन के दौरान कई बार आरती होती है और मूर्तियों को दूध स्नान दिया जाता है और विस्तृत कपड़े और आभूषण में पहना जाता है

आशा करता हूँ की आपको हमारी पोस्ट में गोवेर्धन पूजा क्यों की जाती है,और कैसे की जाती है के बारे में पूरी जानकारी मिल गयी होगी आपको हमारी गोवेर्धन पूजा क्यों की जाती है पोस्ट कैसे लगी हमे कमेंट करके जरूर बताये

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