दशहरा पर निबंध और दशहरा क्यों मनाया जाता है-Why Dusshera is celebrated in hindi

दशहरा यानि की विजय दशमी, जिसका मतलव है विजय का दिन. दशहरा एक प्रसिद्ध हिन्दू त्यौहार है.जो अच्छाई की बुराई पर जीत की ख़ुशी में मनाया जाता है, दशहरा पूरे भारतबर्ष में मनाया जाने बाला हिन्दुत्व त्यौहार है. दशहरा पर दशहरे से 14 दिन पहले से भारत में जगह-जगह रामलीला आयोजन किया जाता है. और कई जगह एक कमेडी के द्वारा मेलो का आयोजन भी किया जाता है.जिसमे राम और रावण की लीलाये दिखाई जाती है, ये मेला कई दिनों तक चलता है. और आखिरी दिन रावण का वध किया जाता है.और इसी के साथ रामलीला को ख़त्म किया जाता है. परन्तु क्या आप जानते विजय दशमी मतलव दशहरा का त्यौहार क्यों मनाया जाता है. और क्यों दशहरे पर जगह-जगह रामलीलाओ को आयोजन किया जाता है. अगर नहीं पता है. तो आज हम इसके बारे में इस पोस्ट में विस्तार से बताते है. की आखिर दशहरे का त्यौहार क्यों मनाया जाता है. तो आइये शुरू करते है.

दशहरा क्यों मनाया जाता है

दशहरा पर पूजा का महत्वा

जिसे हिन्दू धरम के अनुसार माँ दुर्गा और भगवान् श्री राम से जोड़कर देखा जाता है इसी दिन माँ दुर्गा ने महिषापुर से लगातार नौ दिन तक युद्ध करके दशहरा के दिन पर विजय प्राप्त की थी. इसलिए नवरात्री के बाद इसे नौ दुर्गा के नौ शक्तिरूप के विजय-दशमी के रूप में मनाया जाता है. और इसी दिन भगवान् श्री राम ने भी रावण के साथ युद्ध करके दसवे दिन रावण को मारकर विजय प्राप्त की थी. जिसके दस सर थे. इसलिए दशहरा यानि की दस सर बाला प्राण हरण होने बाले दिन के रूप में भी मनाया जाता है.

इस बार दशहरा 08 अक्टूबर 2019 को पूरे भारत में मनाय जाएग इस बार विजय दशमी विजय शुभ मुहूर्त 1:55 से लेकर 2:45 तक है. इस दौरान अपराजित पूजा का करना सुबह मन जाता है. मान्यता के अनुशार इस दिन शुरू किये गए कार्य में विजय अवस्य मिलती है,

दशहरा कैसे मनाया जाता है

दशहरा पर पूजा का महत्वा

भारत में दशहरे के संदर्भ में विभिन्‍न प्रकार की मान्‍यताओं के साथ ही इसे मनाने के तरीके भी अलग-अलग राज्‍यों में अलग-अलग तरह के हैं। यह देश भर में लाखो लोगो द्वारा मनाया जाता है.जोकि अलग अलग स्थानों पर दशहरे और दशौ जैसे नामो से जाना जाता है.इस दिन खुले स्थानों पर मेलो का आयोजन किया जाता है. और पौराणिक श्री लंका के राक्षसराजरावण के बड़े,बड़े पुतलो का प्रदर्शन किया जाता है. बैसे दशमी के दिन सामन्यता बुराई अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में रावण के पुतले का दहन किया जाता है.

रावण के पुतलो को बहुत हर्षो उल्लास के साथ जलाया जाता है. दशहरे के साथ नवरात्री उतसव भी संपन्न किया जाता है. दशहरे के दिन देश भर में जगहों-जगहों पर रामलीला का आयोजन भी किया जाता है. जिसमे भगवान् श्री राम का दस सर वाले दैत्य के साथ मंचन किया जाता है. जिसे देखने के लिए लाखो लोग दूर-दूर से इकठे होते है. भारत में दशहरे पर मेलो में काफी भीड़ देखने को मिलती है. मेलो में आयोजित की जाने बलि रंगमंच को देखने के लिए लोगो में एक अलग उत्साह होता है.ये उत्साह कई दिनों तक लोगो में देखने को मिलता है.

दशहरा का मतलव

दशहरा का मतलव होता है,दसवीं तिथि। पूरे साल में तीन सबसे अच्छी शुभ घड़ियाँ आती है. एक चैत्र शुक्ल प्रदीपदा,दूसरी कार्तिक शुक्ल की प्रदीपदा। ऑर्डर तीसरी हो दशहरा। कहा जाता है. इन तीन शुभ घडियो में कोई भी काम शुरू किया जाता है.तो उसमे अवस्य विजय प्राप्त होती है.इसलिए दशहरे के दिन नकारात्मक शक्तियों ख़त्म होकर आसमान में नई ऊर्जा भर जाती है.

दशहरा पर पूजा का महत्वा

दशहरा पर पूजा का महत्वा

हिन्दू धर्म में विजय दशमी एक ऐसा त्यौहार है.जिस दिन क्षत्रिये शस्त्र-पूजा करते है. जबकि ब्राह्मण इस दिन शास्त्र पूजा करते है. वैदिक हिंदू रीति के अनुसार इस दिन श्री राम के साथ ही लक्षमणजी ,भरत की पूजा की जानी चाहिए। इस दिन लोग मंदिरो से शहर तक भगवान् राम सीता और लक्षम की झांकियो को निकलते है. और बाद में उन्हें मंदिर तक ले जाते है.

दोस्तों तो इस वजह से दशहरा का त्यौहार पूरे भारत में मनाया जाता है. आशा करता हु की आपको हमारी इस पोस्ट में दशहरे के बारे में पर्याप्त जानकारी मिल गयी होगी आपको हमारी ये जानकारी कैसी लगी हमे कमेंट बताये।

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