करवा चौथ व्रत क्यों और कैसे मनाया जाता है-

हैल्लो दोस्तों playhindi.com पर एक बार फिर स्वागत है. दोस्तों आज की पोस्ट हमारी विशेष रूप से महिलाओं के लिए है. क्योकि आज हम इस पोस्ट में करवाचौथ के बारे में बताने जा रहे है. की आखिर करवाचौथ क्यों और कैसे मनाया जाता है. इसलिए आज की हमारी इस पोस्ट को नीचे तक पूरा जरूर पड़े.

माना जाता है,स्त्री शक्ति का रूप होता है.इसलिए उसे ये वरदान मिला है.की वि जिस चीज के लिए भी तप करेगी उसे उसका फल अवस्य मिलेगा। इसका एक उदाहरण हमारी पौराणिक कथाओं में देखने को मिलता है जहां सावित्री अपने पति को यमराज से वापस ले आती है,इसीलिए महिलाएं करवा चौथ के व्रत के रूप में अपने पति की लंबी उम्र के लिए एक तरह से तप करती हैं।

करवाचौथ को महिलाये अपने पति की लम्बी आयु की कामना करती है. लम्बी आयु लिए और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन चन्द्रमा की है,और चन्द्रमा के साथ.-साथ भगवान् शिव,पारवती, श्री गणेश और कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है.परन्तु क्या आप जानते हैं, की आखिर करवाचौथ क्यों मनाया जाता है और इसकी शुरुआत कैसे हुई थी.अगर नहीं जानते है.तो इस पोस्ट को जरूर पड़े क्योकि आज हम करवाचौथ क्यों मनाया जाता है इसके बारे में विस्तार से आपको बताएंगे। तो आइये शुरू करते है.

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करवाचौथ क्यों मनाया जाता है

करवाचौथ क्यों मनाया जाता है, इसके पीछे भी कई पैराणिक कथाये जुडी है, जिसके बारे में हम बात करेंगे

सावित्री और सत्यवान से जुडी है कैरवाचौथ की कहानी

एक किवदंति के अनुसार जब सत्यवान की आत्मा को लेने यमराज आये थे तब उस समय सावत्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के के प्राणो की भीख मांगी थी और अपने सुहाग को न ले जाने के लिए सावित्री ने यमराज से निवेदन किया। परन्तु यमराज नहीं माने, सत्यवान के प्राणो को बचने के लिए सावित्री ने अन्य,जल त्याग दिया और वो अपने पति सत्यवान के शरीर के पास विलाप करने लगी.पतिव्रता स्त्री को देखकर इस विलाप से यमराज विचलित हो गए

सावित्री जी की पवित्रता को देखकर यमराज ने सावित्री से कहा की अपने पति के जीवन के अतिरिक्त वो और कोई वर मांग ले इस पर सावित्री ने यमराज से कहा की आप मुझे कई संतानों की मां बनने का वर दें, जिस पर यमराज ने हां कर दिया। पतिव्रता स्त्री होने के नाते सत्यवान के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष के बारे में सोचना भी सावित्री के लिए संभव नहीं था। अंत में यमराज अपने वचन में बंधने के कारण एक पतिव्रता स्त्री के सुहाग को यमराज लेकर नहीं जा सके और सत्यवान के जीवन को सावित्री को सौंप दिया। कहा जाता है कि तब से स्त्रियां अन्न-जल का त्यागकर अपने पति की दीर्घायु की कामना करते हुए करवाचौथ का व्रत रखती हैं।

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द्रौपती से जुडी है करवाचौथ की कहानी

करवाचौथ क्यों मनाया जाता है, इसके पीछे एक द्रौपती की कहानी भी जुडी हुई है.कहा जाता है.जब अर्जुन नीलगिरि की पहाड़ियों में घोर तपश्या के लिए गए हुए थे. तो बाकी चारों पांडवों को पीछे से अनेक गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था.तभी इस बात को द्रौपती ने श्री कृष्ण को अपना दुःख बताया और अपने पतियों की रक्षा के लिए कृष्ण से कोई उपाए पुछा तभी श्री कृष्ण ने द्रौपती को करवाचौथ का व्रत रखने की सलाह दी थी, द्रौपती ने श्री कृष्ण के बताये अनुसार करवाचौथ का व्रत रखा और जिसे करने से अर्जुन भी सकुशल लौट आये और बाकी पांडवों के सम्मान की भी रक्षा हो सकी थी।

इंद्रप्रस्थपुर से जुड़ा है करवा चौथ

बहुत समय पहले इंद्रप्रस्थ के एक शहर में वेदशर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था वेदशर्मा का विवाह वहा की एक लड़की लीलावती से हुआ जिसके सात महान पुत्र और एक गुणवान वीरावती नाम की पुत्री को जन्म दिया था.सात भाइयो में अकेली बहन होने के कारण सभी उसे बहुत प्यार करते थे.कुछ समय बाद विवाह किसी ब्राह्मण युवक से हो गया कुछ समय बाद वीरावती अपने मायके आई और फिर उसने भाभियों के साथ अपनी पति की लम्बी आयु के लिए करवाचौथ का व्रत रखा था. कहा जाता तभी से करवाचैथ व्रत की शुरुआत हुयी थी.

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करवा चौथ व्रत पूजन सामग्री

करवा चौथ व्रत रखने के लिए काफी सामग्री की आवश्यकता होती है, जिसके बारे में हम आपको बता देते है.

कुमकुम,शहद,अगरवत्ती,पुष्प,कच्चा दूध,शक़्कर,शुद्ध घी,दही, मेहँदी, मिठाई,चावल,हल्दी,रुई,चलनी,बिंदी, छन्नी,पिली मिटटी,आठ पूरियो की अठावरी,हलुआ और दक्षिणा के लिए पैसे इत्यादि।

करवा चौथ 2018

करवा चौथ 2018 में भारत सहित और भी कई देशो में रविवार 28 अक्टूबर को महिलाओ के द्वारा मनाया जायेगा। करवा चौथ का मुहर्त का वह सटीक समय होता है, जिसके भीतर पूजा करना होती है. 28 अक्टूबर को करवा चौथ पूजा का समय पूजा की अवधि 1 घंटा 18 मिनट है.

करवा चौथ व्रत कैसे रखे2018 karwa chauth

करवा चौथ सुहागिन या पतिव्रता स्त्रियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण व्रत है.यह व्रत कार्तिक कृष्ण की चंद्रोदय व्यापनी चतुर्थी को किया जाता है। यदि दो दिन की चंद्रोदय व्यापिनी हो या दोनों ही दिन, न हो तो ‘मातृविद्धा प्रशस्यते’ के अनुसार पूर्वविद्धा लेना चाहिए। करवाचौथ व्रत रखने वाली महिलाओ के लिए सबसे पहले सरगी का सेवन करना चाहिए जो की सास अपनी बहू के लिए भेजती है। सरगी में मीठी खाने की चीज़ें होती हैं। और यह सरगी सुबह ब्रह्म मुहूर्त में खानी चाहिए। उसके बाद नहा धोकर मंदिर जाएं। फिर शिव और गौरी को श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं। और कुछ सामग्री को बचाकर घर ले आये।

और उसे चौथ माता के सामंने चढ़ा दे. सुबह की इस गतिविधि के बाद शाम में चौकी की स्थापना करें जिसमे शिव.गौरी,गणेश,और कार्तिके भगवान् की स्थापना करे. और रात तक चाँद निकलने का इंतजार करे अंत में जब चाँद निकलता है, तब चन्द्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. चन्द्रमा को चलनी से देखे और बाद में पति को भी चलनी से झांके। इसके बड़ा में पति को एक आसान पर बैठा ले और उनका तिलक करे इसके बाद अपने पति के हांथो से कुछ मीठा खाकर अपना व्रत खोल ले इसके बाद सुहाग सामग्री अपनी सास को या किसी बड़ी बुज़ुर्ग को दें। पूजा के बाद सारी सामग्री का विसर्जन कर दें

I hope दोस्तों की आपको हमारी पोस्ट करवाचौथ क्यों मनाया जाता है. इसके बारे में उचित जानकारी मिल गयी. आपको हमारी पोस्ट करवाचौथ क्यों और कैसे मनाया जाता है कैसी लगी हमे कमेंट करके जरूर बताये।

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