अकेलापन मानव शरीर मे उत्तपन्न होने वाली एक ऐसी भावना है, जिसमे व्यक्ति खुद को बहुत ज्यादा अकेला और एकांत में रहने का अनुभव करता है। 

व्यक्ति के दिमाग में अजीबो गरीब ख्याल आते है। जैसे – हमेशा अकेले रहना, शादी ना करना, आत्महत्या करने की सोचना, किसी भी प्रकार की खुशी में शामिल ना होना। 

हमेशा सादगी का जीवन व्यतीत करने की सोचना। ऐसे व्यक्ति धीरे धीरे डिप्रेशन का शिकार हो जाते है, और वह खुद को अकेला, खाली महसूस करने लगते है।

जिसके कारण ऐसे लोगो को दूसरों से Mutual relations बनाने तथा लोगो के साथ घुलना मिलना उनके साथ वक्त बिताने में काफी दिक्कत होती है। 

जो लोग दूसरों से मिलते मिलते नहीं है और अन्य लोगों से ज्यादा बातचीत नहीं करते है उन्हें अपना अकेलापन एक सजा के तौर पर लगता है।

अकेलापन एक ऐसी भयानक बीमारी है जिसमें कैद होकर व्यक्ति के तरह की मानसिक बीमारियों का शिकार हो जाता है।  

मनोवैज्ञानिक मरीज के दृष्टिकोण से अकेलापन से पीड़ित व्यक्ति के लिए यह एक बहुत ही अच्छी थेरेपी है जिंसमे पीड़ित व्यक्ति को समाज को सकारात्मक दृष्टि से देखने मे मदद की जाती है। 

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