डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के 50+अनमोल विचार Thoughts of Dr. Sarvapalli Radhakrishnan

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के 50+अनमोल विचार :-भारत के महान शिक्षाविद, दार्शनिक, उच्च वक्ता और हिन्दू विचारक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर सन 1888 को चेन्नई के तिरुत्तनि स्थान में हुआ था.सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दुसरे राष्ट्रपति थे डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन दिन 5 सितंबर को पूरे भारत में ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान शिक्षक भी थे, उंहोने बहुत से ऐसे अपने विचारे दिए जो हमारे जीवन के लिए काफी जरूरी है ,तो आइये उनके कुछ अनमोल विचारो को जानते है. क्योकि ऐसे ही महान लोगो के कह वाक्य हमारे जीवन को दिशा देते है..

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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के अनमोल विचार

  • मेरे जन्मदिन का जश्न मनाने के बजाय, 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाये पर मुझे गर्व होगा।

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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के 50+अनमोल विचार

  • सहिष्णुता एक ऐसी श्रद्धांजलि है जो परिमित मन अनंत के अविश्वसनीय रूप से भुगतान करता है..

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  • ज्ञान और विज्ञान के आधार पर खुशी और खुशी का जीवन जीना संभव है.

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  • हमारे सभी विश्व संगठन अप्रभावी साबित होंगे,यदि सच्चाई कि प्रेम नफरत से मजबूत है, उन्हें प्रेरित नहीं करता है.

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  • धर्म भय पर जीत है,विफलता और मौत का विनाशक है.

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  • मानव का का दानव होना उसकी हार है,मानव का महामानव होना उसका चमत्कार है’मनुष्य का मानव होना उसकी जीत है.

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  • केवल निर्मल मन के ही आदमी जीवन के आध्यात्मिक अर्थ को महसूस कर पाते है . स्वयं के प्रति ईमानदारी ही आध्यात्मिक सत्यनिष्ठा की स्थिति है.

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  • मनुष्य एक विरोधाभासी है- इस दुनिया की निरंतर महिमा और घोटाला।

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 Thoughts of Dr. Sarvapalli Radhakrishnan

  • भगवान सभी आत्माओं की आत्मा है – सर्वोच्च आत्मा – सर्वोच्च चेतना है।

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  • शिक्षा का अंतिम उत्पाद एक स्वतंत्र रचनात्मक व्यक्ति होना चाहिए, जो ऐतिहासिक परिस्थितियों और प्रकृति की प्रतिकूलताओं के खिलाफ लड़ाई कर सकता है.

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महात्मा गाँधी जी के नारे

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  • आयु या युवा समय का मापदंड नहीं है. हम जितना खुद को महसूस करते हैं हम उतने ही युवा या उतने ही बुजुर्ग हैं.

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  • उम्र या युवावस्था का काल-क्रम से लेना-देना नहीं है. हम उतने ही नौजवान या बूढें हैं जितना हम महसूस करते हैं. हम अपने बारे में क्या सोचते हैं यही मायने हमे रखता है.

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  • शिक्षा का परिणाम एक मुक्त रचनात्मक व्यक्ति होना चाहिए जो ऐतिहासिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध लड़ सके.

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 Thoughts of Dr. Sarvapalli Radhakrishnan

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अनमोल वचन

  • कोई भी जो स्वयं को सांसारिक गतिविधियों से दूर रखता है और इसके संकटों के प्रति असंवेदनशील है वास्तव में बुद्धिमान नहीं हो सकता है.

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  • माता-पिता के बाद, हमारे शिक्षक ही एकमात्र व्यक्ति हैं जिन्होंने हमें सभ्य और अनुशासित व्यक्ति बनाने में इतना प्रयास किया है। वे युवा दिमाग की खेती और पोषण में अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा हमे समर्पित करते हैं।

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  • सहिष्णुता श्रद्धांजलि है जो परिमित मन अनंत की अविभाज्यता का भुगतान करता है.

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  • दुनिया के एक बड़े हिस्से ने भारत से अपनी धार्मिक शिक्षा प्राप्त की.धार्मिक सामान के साथ लगातार संघर्ष के बावजूद, भारत ने सदियों से आत्मा के आदर्शों को तेजी से आयोजित किया है.

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  • हिंदू न केवल यह महसूस करता है कि सभी सड़कों पर एक सुप्रीम का नेतृत्व होता है, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को वह सड़क चुननी चाहिए जो उस बिंदु से शुरू होती है जिस पर वह खुद को स्थापित करने के पल में पाता है.

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  • ऐसा माना जाता है, की एक साहित्यिक प्रतिभा ही सबको समान दिखती है, परन्तु उसके सामान कोई नहीं दिखता है

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दोस्तों डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के एक महान व्यक्ति साथ एक महान शिक्षक भी थे जिन्होंने भारत के लिए बहुत कुछ किया इसलिए हमने आपको उनके कुछ अनमोल विचार आपके साथ शेयर किये है।

जो हमारे जीवन को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है. उम्मीद करता हूँ आपको हमारी ये पोस्ट पसंद आयी होगी।आपको हमारी पोस्ट कैसी लगी आप हमे कमेंट करके जरूर बताये,

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