जानिए नवरात्री का व्रत कैसे और क्यों रखा जाता है-How is Navratri fast in hindi

भारत एक ऐसा देश है जिसे हम त्योहारों का देश भी कहे सकते है, भारत में अनेको त्यौहार है जिसे भारतवासी बहुत हर्षो उल्लास के साथ मनाते है.और आज हम इस पोस्ट में बात करने जा रहे नवरात्री की जिसे महानवमी भी कहा जाता है. नवमी नवरात्री का आखरी दिन और दुर्गा पूजा का तीसरा दिन होता है. माँ दुर्गा के ये नौ दिन हिन्दू धर्म में बहुत धूम धाम से मनाये जाते है. इसके बाद दसवे दिन दशहरा जिसे विजयदशमी भी कहा जाता है जिसे एक बड़े पर्व के रूप में मनाया जाता है.

अष्टमी की शाम से ही नवमी की तिथि लग जाती है। इस दिन नौ दिन के उपवास और तप का आखिरी दिन होता है। इस दिन जिन लोगो ने नौ दिन का नवरात्र व्रत रखा होता है.और आज ही के दिन कन्याओ को घर बुलाकर उन्हें भोजन कराया जाता है.और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है. क्योकि पौराणिक कथाओ के अनुसार छोटी कन्याओ को देवी का रूप मन जाता है. साथ ही ऐसा कहा गया है कि कन्याओं के पूजन के बाद ही नौ दिन के बाद व्रत खोला जाता है. परन्तु क्या आप जानते की शक्ति उपासना का पर्व नवरात्री क्यों मनाया जाता है.और आखिर क्यों माँ दुर्गा की आराधना क्यों की जाती है. नहीं न पर आज में नवरात्री पूरी जानकारी देंगे की आखिर नवरात्री का व्रत क्यों और कैसे रखा जाता है. आइये जानते है-

नवरात्री क्यों मनाया जाता है

हम सभी जानते है की हर त्यौहार के पीछे किसी न किसी इतिहास के पीछे कोई न कोई कहानी जुडी हुई होती है ठीक इसी तरह नवरात्री के पीछे भी कई कहानियां जुडी हुई है. जिसके बारे में हम इस पोस्ट में जानते है-

जानिए नवरात्री का व्रत कैसे और क्यों रखा जाता है

नवरात्री कथा

प्रथम कथा के अनुसार माँ दुर्गा ने महिषासुर वध किया था इसलिए इस दिन को महानवमी और दुर्गा नवमी के रूप में पूरे भारत में मनाया जाता है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन माँ पारवती जी ने महिषासुर राक्षस को मारने के लिए दुर्गा का रूप लिया था.और महिषासुर एक राक्षस था जिससे मुकाबला करना सभी देवताओं के लिए मुश्किल हो गया था। इसलिए आदिशक्ति ने दुर्गा का रुप धारण किया और महिषासुर से 8 दिनों तक युद्ध किया और नौवें दिन महिषासुर का वध कर दिया। उसके बाद से नवरात्रि का पूजन किया जाने लगा नौवे दिन को महानवमी के दिन सबसे पहले भगवन राम से युद्ध करने से पहले नौ दिन माँ दुर्गा की पूजा की थी बाद लंका पर चढाई दसवे दिन रावण का वध किया था इसलिए नवरात्री के अगले दिन विजयदशमी का पर्व पूरे भारत में हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है.इस दिन को सच्चाई की बुराई पर जीत और धर्म की अधर्म की जीत के रुप में मनाया जाता है।

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नवरात्र का व्रत कैसे रखे

नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना करे घट को भगवान गणेश माना जाता है.और किसी भी नवरात्री का व्रत कैसे और क्यों रखा जाता है, जैसा की हु जानते है की नवरात्र हिन्दुओ का ऐसा पर्व है जिसमे माँ दुर्गा की पूजा की जाती है.नवरात्र का अर्थ है नौ रातों का समूह जिसमे माँ दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रो में माँ दुर्गा का पूजन करके भक्त नवरात्री का व्रत कैसे और क्यों रखा जाता है. मां दुर्गा के नौ दिव्‍य रूपों का नाम व संक्षिप्‍त वर्णन निम्‍नानुसार हैं:-

  • शैलपुत्री – पहाड़ों की पुत्री होता है।
  • ब्रह्मचारिणी – ब्रह्मचारीणी।
  • चंद्रघंटा – चाँद की तरह चमकने वाली।
  • कूष्माण्डा – पूरा जगत उनके पैर में है।
  • स्कंदमाता – कार्तिक स्वामी की माता।
  • कात्यायनी – कात्यायन आश्रम में जन्‍मी।
  • कालरात्रि – काल का नाश करने वाली।
  • महागौरी – सफेद रंग वाली मां।
  • सिद्धिदात्री – सर्व सिद्धि देने वाली।

1.शैलपुत्री:नवरात्र के पहले दिन मां के जिस रूप की उपासना की जाती है, उसे शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण मां दुर्गा के इस रूप का नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा था।

2.ब्रह्मचारिणी:भारतीय संक्राति की हिन्दू मान्यता के अनुसार माँ दुर्गा का ब्रह्मचारिणी रूप हिमालय और मैना की पुत्री है.जिन्होंने भगवान नारद के कहने पर भगवन संकर की कठिन तपस्या की जिससे खु श होकर ब्रम्‍हाजी ने इन्‍हे मनोवांछित वरदान दिया जिसके प्रभाव से ये भगवान शिव की पत्‍नी बनीं।संस्‍कृत भाषा में ब्रह्म का अर्थ होता है तपस्या, यानी तप का आचरण करने वाली माता भगवती के रूप को ही माता ब्रह्मचारिणी के नाम से जाना जाता है और नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के इस रूप की उपासना की जाती है।

3.चंद्रघंटा: जब महिषासुर के साथ माता दुर्गा का युद्ध हो रहा था, तब माता ने घंटे की टंकार से असुरों का नाश कर दिया था। इसलिए नवरात्रि के तृतीय दिन माता के इस चंद्रघण्‍टा रूप का पूजन किया जाता है

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4. कूष्माण्डा: नवरात्र के चौथे दिन माँ पारबंरा भगवती दुर्गा की पूजा की जाती है.मान्यता के अनुसार जब सृष्टि अस्तित्व नहीं था.तब कूष्माण्डा देवी ने ब्रमांड की रचना की थी.

5. स्कंदमाता:हिन्‍दु धर्म की मान्‍यतानुसार जब अत्याचारी दानवों का अत्याचार बढ़ता है, तब स्‍कंदमाता, संत जनों की रक्षा के लिए सिंह पर सवार होकर दुष्टों का अंत करती हैं।देवी स्कन्दमाता की चार भुजाएं हैं जहां माता अपने दो हाथों में कमल का फूल धारण करती हैं.

6.कात्यायनी:नवरात्र के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है जहां कात्यायन ऋषि के यहां जन्म लेने के कारण माता के इस स्वरुप का नाम कात्यायनी पड़ा

7.कालरात्रि: माँ दुर्गा जी सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जाना जाता है.दुर्गापूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन ‘सहस्रार’ चक्र में स्थित रहता है। इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है।

8.महागौरी: माँ दुर्गा जी की आठवीं शक्ति का नाम है महागौरी दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है। इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है। इनकी उपासना से भक्तों को सभी कल्मष धुल जाते हैं

9 सिद्धिदात्री:माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है

नवरात्री का व्रत कैसे रखा जाता है

नवरात्र के पहले दिन स्थापना करे और उस दिन व्रत रखने का संकल्प ले और अपने अनुसार व्रत रखे.पर ये ध्यान रखें व्रत जैसे भी करें, माँ दुर्गा की अराधना में कोई कमी नहीं छोड़ें, पुरे मन से इन नौ दिनों तक पूजा पाठ करें, मन के मैल को निकालें, तभी आप को व्रत का फायदा होगा। दुर्गा माँ की कृपा आप पर होगी, ये सोचे को इन नौ दिनों में अपने आप को अलग करना है, ताकि मेरा मन निर्मल हो, पाप मुक्त हो, लोगों को दुःख नहीं पहुचाएं, वैर भाव नहीं रखें, पशु पक्षियों और गरीबों का सेवा करें, बड़ों का आदर करें, छोटे को प्यार दें।

आशा करता हूँ की आपको हमारी इस पोस्ट में जानिए नवरात्री का व्रत कैसे और क्यों रखा जाता है के पूरी जानकारी मिल गयी होगी आपको जानिए नवरात्री का व्रत कैसे और क्यों रखा जाता है जानकारी कैसी लगी हमे कमेंट करके जरूर बताये

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