गुरु नानक देव जी के अनमोल विचार-Thoughts of Guru Nanak Dev Ji in hindi

हैल्लो दोस्तों हमने आपको पिछली पोस्ट में गुरु नानक जयंती के बारे में बताया था की उनका जन्म कहा हुआ था और उनकी जयंती क्यों और कैसे मनाई जाती है. तो क्यों न दोस्तों आज हम उनके ऐसे विचारो के बारे में भी जान लेते है जो हमारे जीवन को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है.हम आपको बता दे की गुरु नानक देव जी सिक्खो के प्रथम गुरु है.गुरु नानक देव जी के अनुदायी गुरु नानक देव जी को बाबा नानक,नानकशाह नामो से सम्भोधित करते है.

लद्दाख और तिब्बत में इन्हे नानक लामा भी कहा जाता है.गुरु नानक देव बचपन से ही आध्यात्मिक ज्ञान के प्रवर्तक थे उनका मानना था की यह संसार ईश्वर द्वारा बनाया गया है और हम सब ईश्वर के ही सन्तान है और ईश्वर का निवास हर किसी के नजदीक ही है जो हमे गलत सही का बोध कराते है, तो आइये जानते है ऐसे महान आध्यात्मिक ज्ञान रखने वाले गुरु नानक देव के अनमोल विचारो को जो हमारे लिए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है.

Thoughts of Guru Nanak Dev Ji in hindi

.[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″]भगवान् के लिए ख़ुशी के गीत गाओं,प्रभु के नाम की सेवा करो,और उसके सेवको के सेवक बन जाओ. गुरु नानक देव जी [/su_note]

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″]मैं न तो पुरुष और न ही महिला हूँ, न ही मैं नपुंसक हूँ. मैं एक अमनपसंद हूँ, जिसका रूप स्वत: देदीप्यमान, शक्तिशाली कांति है. गुरु नानक देव जी [/su_note]

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″] बीज चाहे किसी भी प्रजाति का हो, उपयुक्त मौसम में तैयार की हुई जमीन में बोते हैं तो, बीज में मौजूद विशेष गुणों वाला एक ही तरह का पौधा उगता है.. गुरु नानक देव जी [/su_note]

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″] रस्सी की अज्ञानता के कारण रस्सी सांप प्रतीत होता है; स्वयं की अज्ञानता के कारण क्षणिक स्थिति भी स्वयं का व्यक्तिगत, सीमित, अभूतपूर्व स्वरूप प्रतीत होती है.. गुरु नानक देव जी [/su_note]

गुरु नानक देव जी के अनमोल विचार

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″] दुनिया में किसी व्यक्ति को भ्रम में नहीं रहना चाहिये. बिना गुरु कोई भी दुसरे किनारे को पार नहीं कर सकता।।। गुरु नानक देव जी [/su_note]

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[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″]मेरा जन्म ही नहीं हुआ है,तो भला मेरी मृत्यु कैसे हो सकती है. …गुरु नानक देव जी [/su_note]

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″]तू अगर मुझे नवाजे तो तेरा करम है मेरे मालिक,वरना रहमतों के काबिल मेरी बंदगी नहीं [/su_note]

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″]वह सब कुछ है लेकिन भगवान् केवल एक ही है.उसका नाम सत्य है,रचनात्मक उसकी शख्सियत है और अनश्वर ही उसका स्वरुप है। जिसमे जरा भी डर नही, जो द्वेष भाव से पराया है। गुरु की दया से ही इसे प्राप्त किया जा सकता है।[/su_note]

गुरु नानक देव जी के अनमोल विचार

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″]ये पूरी दुनिया कठनाइयों में है वह जिसे खुद पर भरोसा है वही विजेता कहलाता है.[/su_note]

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″]ना मै पुरुष हूँ,न ही महिला और न ही नंपुसक,मै तो बस एक शंन्तिवाहक हूँ जिससे अपार आत्मविश्वास, साहस और अनंत ज्योति है।[/su_note]

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[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″]वो लोग जिनके पास प्यार है,वे उन लोगो में से है जिन्होंने भगवन ढूंढ लिया।[/su_note]

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″]सांसारिक प्यार को जला दे, अपनी राख को घिसे और उसकी स्याही बनाये, अपने दिल को कलम (पेन) बनाये, अपनी बुद्धि को लेखक बनाये, और वह लिखे जिसका कोई अंत ना हो और जिसकी कोई सीमा न हो।…….. गुरु नानक देव जी [/su_note]

guru nanak dev ji

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[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″] ना मै बच्चा हूँ,और न मै एक युवक हूँ, ना ही मैं पौराणिक हूँ, ना ही किसी जाति का हूँ. …….. गुरु नानक देव जी [/su_note]

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″]धन-समृद्धि से युक्त बड़े बड़े राज्यों के राजा-महाराजों की तुलना भी उस चींटी से नहीं की जा सकती है जिसमे में ईश्वर का प्रेम भरा हो। . …….. गुरु नानक देव जी [/su_note]

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″]ईश्वर का नाम तो सभी लेते हैं परन्तु कोई भी उसके रहस्य का थाह नहीं पा सकता है। यदि कोई गुरु की कृपा से अपने भीतर ईश्वर का नाम बिठा ले तो ही उसे फल प्राप्ति हो सकती है। :-श्री गुरु नानक देव जी[/su_note]

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″] अहंकार मनुस्य को मनुष्य नहीं रहने देता है,अतः अंहकार कभी नहीं करना चाहिए। विनम्र हो सेवा भाव से जीवन गुजारना चाहिए :-श्री गुरु नानक देव जी[/su_note]

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″] गुरु एक ऐसी नदी के सामान है,जिसका जल सर्वदा निर्मल और स्वक्ष रहता है.और उससे मिलने पर तुम्हारा मैल धूल जाता है…श्री गुरु नानक देव जी[/su_note]

बाबा देव जी

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″] जो असत्य बोलता है,वह गंदगी खाता है,और जो स्वं में भ्रम में पड़ा हुआ है,वो दुसरो का क्या उपदेश दे सकता है….श्री गुरु नानक देव जी[/su_note]

[su_note note_color=”#cdb4cd” radius=”4″]रैन गवाई सोई के, दिवसु गवाईयाँ खाय, हीरे जैसा जनमु है, कउडी बदले जाय। अर्थात मनुष्य अपना जीवन सोने और खाने जैसे कार्यों में गवा देता है और उसका मनुष्य जीवन बर्बाद हो जाता है.. :-श्री गुरु नानक देव जी[/su_note]

[su_note note_color=”#bed0d7″ radius=”4″]धन-समृद्धि से युक्त बड़े – बड़े राज्यों के राजा-महाराजों की तुलना भी उस चींटी से नहीं की जा सकती है जिसमे में ईश्वर का प्रेम भरा हो.[/su_note]

[su_note note_color=”#bed0d7″ radius=”4″]बीज चाहे किसी भी प्रजाति का हो, उपयुक्त मौसम में तैयार की हुई जमीन में बोते हैं, तो बीज में मौजूद विशेष गुणों वाला एक ही तरह का पौधा उगता है[/su_note]

[su_note note_color=”#bed0d7″ radius=”4″]दुनिया में किसी भी व्यक्ति को भ्रम में नहीं रहना चाहिए. बिना गुरु के कोई भी दुसरे किनारे तक नहीं जा सकता है.[/su_note]

[su_note note_color=”#bed0d7″ radius=”4″]भगवान एक है, लेकिन उसके कई रूप हैं. वो सभी का निर्माणकर्ता है और वो खुद मनुष्य का रूप लेता है.[/su_note]

[su_note note_color=”#bed0d7″ radius=”4″]यदि एक दिन संसार के सभी सुख और वैभवों को छोड़ना ही है, तो उनमें लिप्त क्यों हुआ जाय. दुनिया में जल के बीच कमल की भांति क्यों न रहा जाए[/su_note]

आशा करता हूँ दोस्तों की आपको हमारी गुरु नानक देव जी के अनमोल विचार की ये पोस्ट पसंद आयी होगी आपको पोस्ट कैसी लगी हमे कम्मेंट करके जरूर बताये और हा गुरु नानक देव जी के अनमोल विचार को आप अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे.

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