धनतेरस क्यों और कैसे मनाया जाता है -Why and how is Dhanteras celebrated

धनतेरस क्यों और कैसे मनाया जाता है -Why and how is Dhanteras celebrated:-कार्तिक मास की कृष्ण त्रोदशी को धनतेरस कहते है. दोस्तों धनतेरस का त्यौहार दीपावली के त्यौहार के आने की सूचना देता है. इस दिन घर के द्वार पर एक दीपक को जलाकर रखा जाता है.धनतेरस पर बर्तनो खरीदना बहुत शुभ माना है. धनतेरस त्यौहार माँ लक्ष्मी को समर्पित है. पांच दिवसीय उत्सव के इस प्रथम चरण को ही धनतेरस या त्रयोदसी कहते है. इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की फूलो की माला।मिठाई ,घी के दिए अदि जलाकर पूजा की जाती है.परन्तु क्या आप जानते है की आखिर ऐसा क्यों किया जाता है मतलव धनतेरस का त्यौहार क्यों मनाया जाता है. अगर नहीं जानते है. तो आज आप इस पोस्ट में अच्छी तरह जान सकते है. की आखिर धनतेरस का त्यौहार क्यों मनाया जाता है. तो आइये शुरू करते है.

इसे भी पड़े

धनतेरस क्यों और कैसे मनाया जाता है -Why and how is Dhanteras celebrated

शास्त्रों अनुसार भगवान् धवंतरि देवताओ के बैघ है. और जब कार्तिक त्रयोदसी के दिन समुन्द्र मंथन के दौरान चिकित्सा विज्ञानं के अनुसार देवता भगवान् धवंतरि प्रकट हुए थे और जब भगवान् धवंतरि प्रकट प्रकट हुए थे तब उनके हाथ में एक वर्तन या चांदी का एक कलश था जिसे शुभ माना जाता है. कहा जाता है. की इसी लिए धनतेरस का त्यौहार पूरे भारत में मनाया जाता है. और बर्तन का खरीदना भी शुभ माना जाता है.

इसके बारे में भी जरूर जाने

एक अन्य कथा के अनुसार भगवान् विष्णु न भय से मुक्ति दिलाने भगवान् विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंच गए तभी वह वामन रूप में विष्णु जी की गुरु शंकराचार्य ने उन्हें पहचान लिया और शंकराचार्य ने राजा से आग्रह किया की अगर वामन आप से कुछ भी मांगे तो उन्हें इंकार कर दे. उन्होंने राजा को बता दिया की वामन के रूप में विष्णु जी है, जो देवताओ की सहायता के लिए तुमसे सब कुछ छीनने आये है परन्तु राजा बलि ने शंकराचार्य की बात नहीं मानी और और वामन द्वार मांगी तीन पग भूमि दान करने के लिए कमंडल से जल लेकर संकल्प लेने लगे.

इसी समय जल को रोकने के लिए शंकराचार्य ने राजा बलि के कमंडल में लघु रूप का धारण करके प्रवेश कर गए इससे कमंडल से जल निकलना बंद हो गया.इस बात को भगवन विष्णु वामन समझ गए थे की इसमें शंकराचार्य की कोई चाल है. तभी भगवान् वामन ने अपने हाथ के कुशा को इस तरह कमंडल पर रखा जिससे शंकराचार्य की एक आंख फुट गयी। इससे गुरु शंकराचार्य तुरंत कमंडल से बहार निकल आये. और राजा बलि ने तीन पग भूमि को दान करने का संकल्प ले लिया और राजा बलि के लिए कोई स्तन नहीं बचा जिससे राजा बलि को अपना सर भगवान् वामन के चरणों में रख दिया।और वो अपना सबकुछ गवा बैठा। और इस तरह देवताओ को राजा बलि के भय से मुक्ति मिल और जो राजा बलि ने देवताओ से धन सम्पति छीनी थी वो देवताओ को वापस मिल गयी कहा जाता है. की इसी के उपलक्ष्य में धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है.गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है

इस बार धनतेरस का त्यौहार 5 नबम्बर 2018 को पूरे भारत में मनाया जायेगा। आज विशेष रूप से भारत के अलग अलग जगहों पर बाजारों को एक अलग तरह से सजाया जाता है. बाजारों में इस दिन बर्तन खरीदने बलि की एक अलग ही भीड़ देखने को मिलती है. इस दिन बाजारों में लोगो का बर्तन खरीदने का एक अलग उत्साह होता है. धनतेरस के दिन बर्तन खरीदना बहुत ही सुबह मन जाता है.

धनतेरस का त्यौहार कैसे मनाया जाता है

धनतेरस त्यौहार के साथ ही दिवाली के पांच दिन का त्यौहार शुरू होता है. धनतेरस को भगवान् धन्वंतरि की पूजा की जाती है. धनतेरस पर बाजारों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है. बाजारों को तरह-तरह के बर्तनो से सजाया जाता है. क्योकि इस दिन बर्तन का खरीदना बहुत शुभ मन जाता है. इस लिए बाजारों में बर्तनो का भंडार देखने को मिलता है. लोगो में भी बर्तनो को खरीदने का एक अलग उत्साह होता है. धनतेरस के दिन लोग चांदी, सोने की धातु को खरीदना शुभ मानते है.

धनतेरस पर पूजा

धनतेरस की संध्या में यमदेव निमित्त दीपदान किया जाता है. इसके फलस्वरूप उपासक और उसके परिवार को मृत्युदेव यमराज के कोप से सुरक्षा मिलती है. विशेष रूप से अगर गृहलक्ष्मी इस दिन दीपदान करे तो पूरा परिवार स्वस्थ्य रहता है. जिस तरह दिवाली पर माँ लक्ष्मी की पूजा होती है उसी तरह धनतेरस पर भगवान् कुबेर की पूजा भी की जाती है क्योकि भगवान् कुबेर को धन का राजा माना जाता है.

उम्मीद करता हू की आपको हामरी पोस्ट में धनतेरस क्यों और कैसे मानते है के बारे में उचित जानकारी मिल गयी होगी आपको हमारी पोस्ट कैसी लगी हमे कमेंट करके जरूर बताये। और इस पोस्ट को अपने दोस्तों और परिवार वालो के साथ फेसबुक व्हाट्सप्प पर जरूर साझा करे,

Leave a Comment